Thank you माँ !

कहते हैं कि एक माँ ही अपने बच्चे को खुद से ज्यादा प्यार कर पाती है और दुनिया में ऐसा कोई और रिश्ता नहीं जो ऐसा प्यार कर सके भले ही वो एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका के लिए हो या फिर एक पिता का अपने बच्चों के लिए.

जब हम छोटे होते हैं तो माँ ही हमारे पीछे भाग भाग कर हमें खाना खिलाती है. हमारी सारी उलटी सीधी फर्मायेशों को पूरा करने का हर प्रयास करती है. हमें चोट लगती है तो सबसे ज्यादा दर्द माँ को ही होता है. हमारी तबियत खराब होती है तो माँ ही रात रात भर जाग कर हमारे पास बैठी रहती है.

माँ ही बिना कुछ कहे हमारे मन की सारी बातें एक पल में समझ जाती है. पूरी निष्ठां और पूरे समर्पण से माँ हमारे लिए वो सब कर जाती है जो एक आम मनुष्य करने की सोच भी नहीं सकता और अगर सोच भी ले तो उसको पूरा नहीं कर सकता.

बहुत से मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ये सब करना हमारे समाज में सम्मान पाने का माओं के लिए एक साधन है. अगर वो ऐसा ना करें तो उन्हें इस समाज में प्रतिष्ठा और इज्जत नहीं मिलेगी जितना उन्हें ये सब कर के मिलती है.

पहले तो मैं ऐसे तर्क से इत्तेफाक नहीं रखता और एक पल को मान भी लें कि ये मनोवैज्ञानिक सच कह रहे हैं तो भी ऐसा कर पाना इतना कठिन है कि इसके पीछे कोई भी कारण हो वो सम्मानजनक और पूजनीय ही हो सकता है.

इसलिए जब भी हमारे मन में अपनी माँ के प्रति ऐसा कोई भाव आये या हमें ऐसा लगे कि हम आत्मनिर्भर हैं तो हमें यही सोच लेना चाहिए कि आज जो कुछ भी हम हैं वो सिर्फ और सिर्फ अपनी माँ की वजह से ही हैं.

कहते हैं जो वास्तु हमें बहुत आसानी से प्राप्त हो जाती है उसकी हमें क़द्र नहीं होती. माँ हमारे जीवन में एक ऐसी महत्त्वपूर्ण इंसान हैं, जिनके बिना हमारा कुछ कर पाना तो दूर की बात, अगर वो नहीं होती तो हम सांस भी नहीं ले पा रहे होते.

हाँ ये बात अलग है कि एक माँ कभी भी अपने बच्चों पे एहसान या हक़ नहीं जमाती ये कह के कि मैंने तुम्हारे लिए कितना किया. इसीलिए शायद कभी कभी हमारे अंदर का इंसान अपनी इंसानियत भूल जाता है.

और हम उसी माँ के बुढ़ापे का सहारा बन्ने के बजाये उसे ऐसे मौके पे अकेला छोड़ के अपने निजी सपनो को पूरा करने में लग जाते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमारे उन्ही सपनो का निर्माण हमारी माँ ने ही किया था. और अगर वो ऐसा नहीं करती तो न हम होते और न हमारे ये सपने.

मुझे नहीं पता कि भगवान् हैं या नहीं. मुझे नहीं पता कि हम इस ज़िन्दगी को जीने के पश्चात किस रूप में कहाँ और क्या कर रहे होंगे. मुझे नहीं पता कि हम फिर से मनुष्य योनी में जन्म लेंगे या नहीं. मुझे नहीं पता कि इस संसार में आने का क्या लक्ष्य है.mother-child

पर मुझे ये ज़रूर पता है कि हमें अपने माता पिता का पूरी श्रधा और पूरे सम्मान और आदर के साथ ख्याल रखना चाहिए, केवल इसलिए नहीं कि उन्होंने हमारे लिए ये सब किया पर इसलिए भी क्योंकि उन्ही से हमारा अस्तित्व है और उन्ही से हमारी सफलता या असफलता.

After reading what I have just written some would be compelled to believe that today is the mother’s day. But even if it is not, I believe there is not a single day that goes by when you
cannot but thank your mother for whatever she has done for you and continues to do so without any expectation what so ever.

Such great and high is her stature that nothing else in the World can match up to the dedication and sincerity that a mother has for her kid. Even a father cannot replicate the same kind of love and affection that a mother has for her child.

That’s why it is said, एक माँ का स्थान इश्वर से भी ऊचा होता है. Today, through thishumble post of mine, I want to give a tribute to all the mothers out there who toil in selflessly day-in-day-out just to make sure that their kids and family get all the happiness in this
World.

Source for Image: http://acelebrationofwomen.org/2013/05/on-mothers-day-its-you-and-me-against-the-world-may-12/

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