तेरी खातिर !

This is a humble tribute to the Indian Team, who performed so well during the World Cup and especially the man, who is fondly referred to as Mahi, our very own Mahendra Singh Dhoni (MSD).

I don’t remember seeing MSD the way when he left the field, for the last time in a World Cup match.

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Few lines to the emotions that he might have gone through walking back to the pavilion after getting run out:

ये वो लम्हा था, जब मैं खुद को रोक ना सका,
जानते हुए भी मैं तेरे लिए कुछ ना कर सका,

उस जस्बे को लिए, लगाई थी मैंने पूरी जान,
पर वो जस्बा भी मेरा आज कम पड़ गया .

दिल में थे अरमान, खुद पे था भरोसा,
हर मुश्किल को पार करने का था हौसला,

तेरे लिए आज फिर एक बार कुछ करने का था मौका,
माफ़ कर देना ऐ यार, जो आज मैं फिर से वो ना कर सका, 

ज़िन्दगी तो चलती रहेगी, बस एक गम रह जायेगा,
वो दो कदम का सफर, हर दिन कम रह जायेगा,

भरोसा करना बस, नियत में कोई कमी ना थी,
दिन आये गये लेकिन आँख में कभी ऐसी नमी ना थी. 

And there walked the man, who gave us fantastic moments in our lifetimes to be cherished for ever and ever. #RESPECT!

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सब बढ़िया है!

There are so many ifs and buts in our lives that I wonder how can one remain happy, calm and composed with things going on all the time in our minds.

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A humble tribute to the ifs and buts which constantly seem to nag us day-in-day-out:

सब बढ़िया है, जब तक बॉस ने डाटा ना हो,
सब बढ़िया है, जब तक बीवी ने आज लेट आने पे क्लास ना लगाई हो,

सब बढ़िया है, जब तक वो लोन की ई म आई टाइम पे ना गयी हो,
सब बढ़िया है, जब तक स्कूल के प्रिंसिपल ने पप्पू की कंप्लेंट करने ना बुलाया हो,

सब बढ़िया है, जब तक किसी फॅमिली मेमबर को डॉक्टर के यहाँ ना जाना पड़ा हो,
सब बढ़िया है, जब तक पड़ोसी ने गाडी गलत पार्क करने पर लड़ाई ना करी हो,

सब बढ़िया है, जब तक किसी काली बिल्ली ने रास्ता ना काटा हो,
सब बढ़िया है, जब तक रास्ते में ड्राइव करते समय ट्रैफिक ना मिला हो,

सब बढ़िया है, जब तक बिजली, पानी इत्यादि की कोई प्रॉब्लम ना हुई हो,
सब बढ़िया है, जब तक आगे करियर कहाँ जाएगा, इसका पता ना हो,

वैसे तो सब बढ़िया ही है, जब तक!

This जब तक  in our lives is screwing us big time.

The question, though, is are we all prepared to let go of this जब तक? for actually realizing the सब बढ़िया है!

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कभी भूले भटके!

Being caught up in the आपा धापी  of life, there are very few occasions when you end up feeling like what I did today,

or

To put it in other words, on very few occasions do we end up taking notice of the same.

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Sharing a few lines in my effort to express what it is:

कभी भूले भटके, ज़िन्दगी अपने से परे लगती है,
कभी भूले भटके, कायनात कुछ और हसीन लगती है,
कभी भूले भटके, चहचहाती चिड़ियाँ दिखती हैं,
कभी भूले भटके, ये हवा चेहरे को छूती है,

कभी भूले भटके, किसी और का ख्याल आता है,
कभी भूले भटके, इंसान इंसान नज़र आता है,
कभी भूले भटके, खुद का पता नहीं चलता,
कभी भूले भटके, इस मदहोशी का आलम आता है,

कभी भूले भटके, मन बेतहाशा सा हो जाता है,
कभी भूले भटके, वही मन कुछ गुनगुनाता है,
कभी भूले भटके, भटकना भी रास आता है,
कभी भूले भटके, उसी भटकने का अंदाज़ पसंद आता है.

और अगर, आपको ये अहसास कभी ना हुआ हो, तो कभी भटक कर तो देखिये,

भूले भटके ही सही, आप उस राह पहुंच ही जायेंगे,
जहाँ भटकना ही शायद इस जीवन का आगाज़  कराता है.

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