सब बढ़िया है!

There are so many ifs and buts in our lives that I wonder how can one remain happy, calm and composed with things going on all the time in our minds.

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A humble tribute to the ifs and buts which constantly seem to nag us day-in-day-out:

सब बढ़िया है, जब तक बॉस ने डाटा ना हो,
सब बढ़िया है, जब तक बीवी ने आज लेट आने पे क्लास ना लगाई हो,

सब बढ़िया है, जब तक वो लोन की ई म आई टाइम पे ना गयी हो,
सब बढ़िया है, जब तक स्कूल के प्रिंसिपल ने पप्पू की कंप्लेंट करने ना बुलाया हो,

सब बढ़िया है, जब तक किसी फॅमिली मेमबर को डॉक्टर के यहाँ ना जाना पड़ा हो,
सब बढ़िया है, जब तक पड़ोसी ने गाडी गलत पार्क करने पर लड़ाई ना करी हो,

सब बढ़िया है, जब तक किसी काली बिल्ली ने रास्ता ना काटा हो,
सब बढ़िया है, जब तक रास्ते में ड्राइव करते समय ट्रैफिक ना मिला हो,

सब बढ़िया है, जब तक बिजली, पानी इत्यादि की कोई प्रॉब्लम ना हुई हो,
सब बढ़िया है, जब तक आगे करियर कहाँ जाएगा, इसका पता ना हो,

वैसे तो सब बढ़िया ही है, जब तक!

This जब तक  in our lives is screwing us big time.

The question, though, is are we all prepared to let go of this जब तक? for actually realizing the सब बढ़िया है!

Source for the Image: https://www.pexels.com/search/good/

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