एक कहानी एक टपोरी की ज़बानी Part-1!

Now, this one is a very special one, as it comes straight from the streets of the dream city, Mumbai. It is a true story of a person whom I know very closely and who is still struggling to get in terms with reality. Without going into details, on second thoughts, it won’t be a bad idea to narrate what the person had to tell me when I last visited Mumbai.

“कहते हैं, जब भगवान् छप्पड़ फाड़ के देते हैं, तो बस दे ही देते हैं, और जब वो लेने पे आ जाये, तो फिर तो कोई भी बचा नहीं सकता, बॉस बोले तो वाट लगनी ही बनती है.

समझ नहीं आता कहाँ से शुरू करूं. कुछ साल पहले की बात है, अपुन मस्त बिंदास हुआ करता था. पता नहीं कहाँ से बीड़ू लोगों ने इंटरनेट का चस्खा लगा दिया. फिर क्या था, बोले तो अपुन को इशक़ हो गया. इशक़ तक ही बात रुक जाती, तब तो मामला रफा दफा हो जाता, पर अपनी तो ऊपर वाले ने सोच के लिखी थी, बस अपुन को तो उसी समुन्दर के तेज़ बहाव में बहते रहना बनता था.

एक दिन रोज़ की तरह, अपुन याहू पे चटिया रहा था. तभी अपुन की नज़र एक लड़की की ऑय डी पे पड़ी. बोले तो नाम को पढ़ के अपनी खोपड़ी सन्नाटे में आ गयी. ये तो नहीं पता कि ये उसका सच्चा नाम था या नहीं, पर दिल में एक बार ज़रूर घंटी बजी. सोचा क्या जाता है, एक पार पिंग करके देखना तो बनता है. और बिना कुछ सोचे समझे, दिल की धकड़ने बढ़ाते हुए, अपुन ने मेसेज मार ही दिया.

५ मिनट के बाद भी जब कोई रिप्लाई नहीं आया, तो अपुन ने सोचा, कि अब चलना चाहिए. कि तभी कंप्यूटर की विंडो में डिंग डोंग हुआ. ये उसी लड़की का मेसेज था जिसके नाम ने अपुन के दिल की घंटी बजा रक्खी थी. सोचा क्या यार, अब क्या उखाड़ लेगा, और जाने का टाइम भी हो रहा था, पर कुछ तो बात थी उसके उस डिंग डोंग में, जिसने मुझे उससे चटियाने पे मजबूर कर दिया.

पूरी रात अपुन उसकी हौबीस के बारे में पूछता रहा और वो हर पांच मिनट में अपनी हौबीस के बारे में मुझे बताती रही. टाइम कैसे बीत गया, जब तक इसका अंदाजा होता, तब तक अम्मी दरवाज़े के बहार से उठा रही थी, कि बेटा सुबह हो गयी. अम्मी को क्या पता था कि मेरी रातों की नींद अब उड़ने वाली थी.

बिना सोये अपुन अगले दिन काम पे चला गया. काम में मन तो लगना नहीं था. बस पूरे दिन उसी की  हौबीस के बारे में सोचता रहा, साथ में इंटरनेट पे रिसर्च भी मारी, जिससे रात में जाके उसको इम्प्रेस कर सकूं.

कहते हैं जब किसी चीज़ को पूरी शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हे उससे मिलाने में लग जाती है. तो फिर उस रात उसको दोबारा आना ही था. अब बात दिल की घंटी से आगे बढ़ने को बेकरार थी. सोचा मिलने को बोल ही देता हूँ, आखिर अपनी सारी फ़ोटो तो मैं उसको भेज ही चूका था, अब अच्छा लगता हूँ तो मिलेगी ही, ये सोच कर मैंने उससे शाम को मिलने को पूछ ही लिया.tapori

इस बार भी ५ मिनट तक कोई जवाब नहीं आया, और छटे मिनट, उसने लॉग आउट कर दिया. मेरा तो मानो बॉस जैसे दिल ही टूट गया. अपुन ने खुद को खूब कोसा, कि इतना शाना बन्ने की क्या ज़रुरत थी. इसी गम में उस रात भी मैं सो ना सका.

अगले दिन काम पे सोता रहा. बॉस ने भी खूब फटकार लगाई. पर क्या करता, कुछ अच्छा ही नहीं लग रहा था. बस एक और रात का इंतज़ार था, और ये आशा थी कि एक गलती तो माफ़ करना बनता ही था, आखिर मैं उसका चैट फ्रेंड जो था.

और उस रात वो फिर से आयी. अपुन ने ५-६ सॉरी मेसेज उसके चिपका डाले ये सोच कि शायद वो मुझे एक और चांस देगी. फिर ५ मिनट तक कोई रिप्लाई नहीं आया तो मैंने सोचा अब तो बैंड बज गया. इसी सोच में मैं लॉग आउट करने ही वाला था कि तभी उसका मेसेज आया: “सॉरी मैं कल लॉग आउट हो गयी थी, वो कभी कभी लाइट चली जाती है ना, तो बताओ कहाँ मिलना है.

अपुन को तो विश्वास ही नहीं हो रेलिया था, कि अपुन के साथ ऐसा भी हो सकता है. अपुन ने जल्दी से मीटिंग सेट की और अगले दिन काम से छुट्टी ले ली. शाम को अपुन का मिलने का प्रोग्राम सेट था. अम्मी ने जो पिछले जन्मदिन पे शर्ट लायी थी, वही पहन के बिंदास अपुन मिलने को पंहुचा.

वो हरे रंग के सलवार सूट में मेरे सामने खड़ी थी. उसकी ज़ुल्फ़े उसके राईट कान को छूते हुए उसके कंधे पे आ रही थी. मुझे तो बॉस उसको देखते ही प्यार हो गया. सोचा आज ही अपनी अम्मी से निकाह की बात कर लूं. पहले आप पहले आप में गाडी ना निकल जाये, मैंने उसको रेस्टोरेंट में बैठने को बोला. वो शर्मा के अपनी पलके झुकाई मेरे सामने वाली सीट पे बैठ गयी.

आगे क्या होगा ये मुझे भी नहीं पता था, पर जो भी होना था वो लिखा जा चुका था……(to be continued)

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