The Forgotten!

कहते हैं किसी चीज़ को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं,
तो क्या ये चाहने में कमी का असर है, या फिर हालातों का फितूर जो कुछ लोग इसी दुनिया की भीड़ में कहीं खो जाते हैं.

हर कोई तेंदुलकर या धोनी तो नहीं होता, पर सब द्रविड़ जैसी मेहनत तो कर ही सकते हैं, फिर क्यों कुछ लोग अपने हुनर का सदुपयोग नहीं कर पाते.

हर कोई सीईओ तो नहीं बन सकता, पर क्यों वो सीईओ बनने के ख्वाब भी देखना भूल जाते हैं, क्या उनमें हिम्मत नहीं होती, या वो इसे अपने से परे समझ कर, उसकी इच्छा रखने का साहस ही नहीं कर पाते.

क्यों मन में इतना डर, क्यों दिल में इतनी असुरक्षा की भावना हमें आगे बढ़ने से रोक देती है.

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क्यों वो आखरी ओवर में १५ रन बनाना असंभव लगने लगता है, क्यों हम प्रयत्न करने से पहले ही हार मान लेते हैं.

जहाँ ज्यातादर लोग, अपने को इस सोच में उलझा हुआ पाते हैं, वही कई लोग ऐसे भी हैं, जो इन बातों पे जीत पा कर इनसे ऊपर उठ जाते हैं, और उन्ही को चढ़ता सूरज इत्यादि जैसे वाक्यों से सम्भोदित किया जाता है.

तो क्या ऐसे लोग बाकी लोगों से अलग होते हैं, क्या उनकी परवरिश किसी ख़ास प्रकार से की जाती हैं, या फिर खुद ही वो अपने को इतना बुलंद कर लेते हैं, कि खुदा भी उनकी रज़ा के सामने झुक जाता है.

जो भी हो, वो इतने भी अलग नहीं होते कि उनकी तरह कोई और बन ना पाए. आखिर गवास्कर के बाद किसने सोचा था कि एक तेंदुलकर आ जायेगा, और तेंदुलकर के बाद किसने सोचा था कि एक कोहली आ जायेगा.

ये वो लोग हैं, जिनको भरोसा होता है, कि वो कुछ कर सकते हैं. ये वो लोग हैं जो दिन भर रात भर केवल उसी सपने को जीते हैं, ये वो लोग हैं, जिनके लिए जीना अपने को उस एक लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित करने के बराबर बन जाता है.

ये लोग उन अनेक लोगों से आगे बढ़ जाते हैं, जो हुनर होने के बावजूद, इसी दुनिया के किसी कोने में अपने को खोया हुआ पाते हैं.

Source for the Image: https://www.flickr.com/photos/alexandra-roseliza/16109918764

Thank you माँ !

कहते हैं कि एक माँ ही अपने बच्चे को खुद से ज्यादा प्यार कर पाती है और दुनिया में ऐसा कोई और रिश्ता नहीं जो ऐसा प्यार कर सके भले ही वो एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका के लिए हो या फिर एक पिता का अपने बच्चों के लिए.

जब हम छोटे होते हैं तो माँ ही हमारे पीछे भाग भाग कर हमें खाना खिलाती है. हमारी सारी उलटी सीधी फर्मायेशों को पूरा करने का हर प्रयास करती है. हमें चोट लगती है तो सबसे ज्यादा दर्द माँ को ही होता है. हमारी तबियत खराब होती है तो माँ ही रात रात भर जाग कर हमारे पास बैठी रहती है.

माँ ही बिना कुछ कहे हमारे मन की सारी बातें एक पल में समझ जाती है. पूरी निष्ठां और पूरे समर्पण से माँ हमारे लिए वो सब कर जाती है जो एक आम मनुष्य करने की सोच भी नहीं सकता और अगर सोच भी ले तो उसको पूरा नहीं कर सकता.

बहुत से मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ये सब करना हमारे समाज में सम्मान पाने का माओं के लिए एक साधन है. अगर वो ऐसा ना करें तो उन्हें इस समाज में प्रतिष्ठा और इज्जत नहीं मिलेगी जितना उन्हें ये सब कर के मिलती है.

पहले तो मैं ऐसे तर्क से इत्तेफाक नहीं रखता और एक पल को मान भी लें कि ये मनोवैज्ञानिक सच कह रहे हैं तो भी ऐसा कर पाना इतना कठिन है कि इसके पीछे कोई भी कारण हो वो सम्मानजनक और पूजनीय ही हो सकता है.

इसलिए जब भी हमारे मन में अपनी माँ के प्रति ऐसा कोई भाव आये या हमें ऐसा लगे कि हम आत्मनिर्भर हैं तो हमें यही सोच लेना चाहिए कि आज जो कुछ भी हम हैं वो सिर्फ और सिर्फ अपनी माँ की वजह से ही हैं.

कहते हैं जो वास्तु हमें बहुत आसानी से प्राप्त हो जाती है उसकी हमें क़द्र नहीं होती. माँ हमारे जीवन में एक ऐसी महत्त्वपूर्ण इंसान हैं, जिनके बिना हमारा कुछ कर पाना तो दूर की बात, अगर वो नहीं होती तो हम सांस भी नहीं ले पा रहे होते.

हाँ ये बात अलग है कि एक माँ कभी भी अपने बच्चों पे एहसान या हक़ नहीं जमाती ये कह के कि मैंने तुम्हारे लिए कितना किया. इसीलिए शायद कभी कभी हमारे अंदर का इंसान अपनी इंसानियत भूल जाता है.

और हम उसी माँ के बुढ़ापे का सहारा बन्ने के बजाये उसे ऐसे मौके पे अकेला छोड़ के अपने निजी सपनो को पूरा करने में लग जाते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमारे उन्ही सपनो का निर्माण हमारी माँ ने ही किया था. और अगर वो ऐसा नहीं करती तो न हम होते और न हमारे ये सपने.

मुझे नहीं पता कि भगवान् हैं या नहीं. मुझे नहीं पता कि हम इस ज़िन्दगी को जीने के पश्चात किस रूप में कहाँ और क्या कर रहे होंगे. मुझे नहीं पता कि हम फिर से मनुष्य योनी में जन्म लेंगे या नहीं. मुझे नहीं पता कि इस संसार में आने का क्या लक्ष्य है.mother-child

पर मुझे ये ज़रूर पता है कि हमें अपने माता पिता का पूरी श्रधा और पूरे सम्मान और आदर के साथ ख्याल रखना चाहिए, केवल इसलिए नहीं कि उन्होंने हमारे लिए ये सब किया पर इसलिए भी क्योंकि उन्ही से हमारा अस्तित्व है और उन्ही से हमारी सफलता या असफलता.

After reading what I have just written some would be compelled to believe that today is the mother’s day. But even if it is not, I believe there is not a single day that goes by when you
cannot but thank your mother for whatever she has done for you and continues to do so without any expectation what so ever.

Such great and high is her stature that nothing else in the World can match up to the dedication and sincerity that a mother has for her kid. Even a father cannot replicate the same kind of love and affection that a mother has for her child.

That’s why it is said, एक माँ का स्थान इश्वर से भी ऊचा होता है. Today, through thishumble post of mine, I want to give a tribute to all the mothers out there who toil in selflessly day-in-day-out just to make sure that their kids and family get all the happiness in this
World.

Source for Image: http://acelebrationofwomen.org/2013/05/on-mothers-day-its-you-and-me-against-the-world-may-12/

The Regime!

Getting up early in the morning for some is an extremely difficult proposition but for others, it is an opportunity to explore yet another day and to experience new things in life. Those who have had a habit of going for a morning walk are so hooked on to it, that if they miss it for a day or two, the guilt and the feeling of having lost something is very hard to get rid off.

And in normal circumstances, the first thing that one does is to see himself/herself in a mirror. They say that mirror always speaks the truth. But when the truth is about you then, sometimes it becomes difficult to accept the same.

If the truth is about how much fat you have accumulated over time in your body, then its even harder for you to digest the fact that you have gone obese. Medically, or going by the standards a person is considered obese when his or her weight is 20% more than the normal that they are supposed to have keeping in mind the BMI index.

What an irony it is that the food items which tend to give you pleasure at one time are the very reasons for making sure that you repent for the pleasures you have had by munching upon the same, in the near future.fat

You end up cursing the food and more so your own taste buds for making you indulge in the very fantasy. Yesterday, I was having this conversation with none other than Saty, whom I was telling how in the past couple of days I have managed to gain if not 7 but certainly 3-4 kgs:

Yaar, when you are at home, you end up eating all the good stuff that your mom makes for you, thereby ending up gaining weight.”—-Me

Ya, I know, that’s why what I do is I try to control myself and see I am so fit 😀 “—Saty

Man, how difficult it is to control. How can you ignore the ladoos and the halwa that is kept right in front of your eyes?”—-Me

Yaar, it is all about discipline, which I think is that virtue of life which decides whether we will emerge successful or not. It is that very ingredient which decides whether it will be a make or break situation for us. Whether it be examinations or whether it be taking control of your life or weight, this is the thing that matters.”—-Saty

Wow, Saty. You have been thinking a lot these days ;). But you have hit the bulls eye here. You are right. Everything in life comes down to whether you are disciplined or not. It is the secret for success and nothing but discipline itself can help you achieve what you want from life.”—-Me

Look at all the greats including Sachin Tendulkar. It might have not been easy for him to get up every morning at 5 a.m. and put in the hard work day-in-day out. After all, he also must have felt really frustrated and down and out at times. Yet he carried on. What complements discipline is the perseverence that one has.”—-Saty

Coupled with the perseverence one needs to have a positive mindset in order to have that self-belief which makes sure that one carries on with his or her efforts without worrying for the results or consequences and hoping that one day you will surely get to experience the sweetness that comes along with success.”—-Me

You should take a resolution that you will try to control your eating habits. Don’t start dieting for it is the worst of the ways to reduce one’s weight. What you can do instead is to reduce the junk food that you happen to eat in a day. Don’t eat too many sweets. Eat those things which are healthy and are not deep-fried. I guess a balanced diet is the key along with a fitness regime where in you get to do both cardio and muscular training. The best is to go for yoga in the morning, say, after a walk.”—Saty

Saty, you are talking like a fitness expert ;). I have read many a columns on the same. I know where this is coming from :). Whatever the source, the points that you are mentioning will go a long way in helping one to remain fit, which will in turn help one to be happy and maintain that confidence which is so important when it comes to carrying yourself around and when it comes to interacting with someone, for you know that the other person will like you in case you are fit and well maintained.”—Me

True, and that is what keeps you going and helps in making you more confident and ambitious.”—-Saty

Saty, don’t you think, we have been able to carve out an entire theory of success here? 😉 “—-Me

Yes, fitness leads to confidence/self-belief which leads to increased ambition/motivation which in turn leads to success.”—-Saty

So, we know now where we have to start from. 🙂 “—Me

That was it for the conversation. Truly, fitness is the most important part of our lives which we cannot afford to ignore. Good health leads to positive thoughts and a positive outlook towards life, which is extremely significant when it comes to staying happy and satisifed and in turn contributes to the well being of a person.fitness

Guys and girls out there, what are you waiting for? It is time to go on a fitness regime and what better way to start than on a weekend itself ;).

Source for Image: http://blog.fooducate.com/2010/10/21/40-of-kids-calories-are-from-junk-food/, http://store.wesmen.ca/browse.cfm/group-fitness-classes/4,273.html